नंबर वन की तरफ तेजी से बढ़ रहा *टूटी कलम समाचार* पत्रकारिता करना हमारा शौक है, जुनून है, आदत है, दिनचर्या है, कमजोरी है,लगन है,धुन है, पागलपन है ,पत्रकारिता करना हमारे पेट भरने का साधन नहीं है, और ना ही ब्लैकमेलिंग, धमकी,चमकी,देकर, विज्ञापन के नाम पर उगाही,वसूली करने का लाइसेंस मिला हुआ है, संपादक टिल्लू शर्मा लेखक, विश्लेषक, कवि,व्यंगकार,स्तंभकार, विचारक, माता सरस्वती का उपासक,परशुराम का वंशज,रावण भक्त,कबीर से प्रभावित,कलम का मास्टरमाइंड, सही और कड़वी सच्चाई लिखने में माहिर, जहां से लोगों की सोचना बंद कर देते है हम वहां से सोचना शुरू करते है, टिल्लू शर्मा के ✍️समाचार ज्यों नाविक के तीर,🏹 देखन म छोटे लागे, घाव करे गंभीर, लोगों की पहली पसंद टूटी कलम समाचार बन चुका है, सरकार एवं जिला प्रशासन का व्यवस्थाओं समस्याओं पर ध्यान आकर्षण करवाना हमारा पहला कर्तव्य है
दुर्ग। छत्तीसगढ़ जीएसटी विभाग ने दुर्ग के चर्चित सितार गुटखा कारोबारी गुरमुख जुमनानी के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई की है और 317 करोड़ रुपए की पेनल्टी ठोंक दी है, जुमनानी पिछले 5 सालों से पूरे प्रदेश में प्रतिबंधित तंबाकू युक्त गुटखे का अवैध साम्राज्य चला रहा था, विभाग ने बीते पांच वर्षों के कारोबार का आकलन करने के बाद ही यह टैक्स और जुर्माने की राशी तय की
प्लानिंग के साथ चल रहा था अवैध कारोबार
जीएसटी अधिकारियों की जांच में खुलासा हुआ है की जुमनानी ने बेहद शातिर तरीके से अपना नेटवर्क फैला रखा था, इस अवैध धंधे में उसके परिवार के सदस्य भी शामिल थे, गोदामों के लिए रेंट एग्रीमेंट गुरमुख के पिता के नाम पर किया जाता था ताकि मुख्य आरोपी तक न पहुंचा जा सके इसी गुप्त ठिकानों पर गुटखे की पैकिंग होती थी और फिर बोरों में भरकर इसे बाजारों में खपाया जाता था, जांच टीम को मौके से कई पुराने एग्रीमेंट और संदिग्ध दस्तावेज मिले है
बेटे की फैक्ट्री में तैयार होता था जहर
जांच में यह चौंकाने वाला मामला सामने आया की गुटखे का कच्चा माल यानि रॉ मटेरियल राजनांदगांव में स्थित कोमल फूड नाम की फैक्ट्री में तैयार होता था, जो गुरमुख के बेटे सागर के नाम पर है, कागजों के हिसाब से यह फैक्ट्री सिर्फ मीठी सुपारी बनाने के लिए दर्ज थी, लेकिन असल में यहां प्रतिबंधित गुटखे का मसाला तैयार किया जाता था, इसके बाद माल को दुर्ग के गनियारी और जोरातराई भेजा जाता था, जहां मशीनों से पैकिंग होती थी, यह पूरा खेल रात 10 बजे से सुबह 7 बजे तक खेला जाता था
मशीन की रफ्तार और करोड़ों का टर्नओवर
गुटखे का फॉर्मूला तैयार करने वाले दीपक पांडे से जब पूछताछ की गई तो उसने बताया कि फैक्ट्री में लगी मशीनें 1 मिनट में 250 पैकेट तैयार करती थीं, रोजाना करीब 50 बोरा गुटखा धड़ल्ले से बाजार में बेचा जा रहा था, हैरानी की बात ये है की मजदूरों को छिंदवाड़ा के एक लेबर कॉन्ट्रैक्टर के जरिए बुलाया जाता था और महीने में केवल 18 दिन ही काम लिया जाता था ताकि किसी को शक न हो सके
सील तोड़कर सामान गायब
इस कार्रवाई के दौरान यह भी पता चला कि जब खाद्य विभाग ने फैक्ट्री को सील किया था, तब दबंगई दिखाते हुए जुमनानी ने टीन शेड तोड़कर मशीनें और कीमती सामान वहां से निकाल लिया अधिकारियों का मानना है कि पुलिस और खाद्य विभाग के कुछ अन्दर के लोगो की वजह से छापेमारी की सूचना जुमनानी तक पहुंच जाती थी, जिससे वह लंबे समय तक फरार रहने में कामयाब हो जा रहा था



