रायगढ़—- सरई लकड़ी के 10 अवैध गोले चक्रधरनगर थाना प्रभारी विवेक पाटले ने मय वाहन जप्त कर मामला वनमंडल को सौप दिया गया था। जिस पर मीडिया ने प्रमुखता से उठाया था। मीडिया में खबर आने के बाद वनमंडल अपना गिरेबां बचाने के लिए आरा मिलो की जांचकर महज खानापूर्ति कर रहा है। जिसे वनमंडल रूटीन चैकिंग बतला रहा है दरसल वह मामले को भटकाने का प्रयास है। दघोरा,जामगांव,कोतरलिया,बंगुरसिया, गोपालपुर,बरलिया,खैरपुर,कृष्णापुर आदि क्षेत्रों में इमारती एवं फलदार वृक्षों की कटाई कर वही सुखाकर,साईज अनुसार ढालकर लकड़ियों के खरीददारों के मुफिक स्थानों पर कार्य रात के अंधेरों में कई दशकों से चल रहा है।
शहर के फर्नीचर विक्रेताओं के गोदामो में पहुंच रही है इमारती लकड़ीयां——— अगर देखा जाये तो शहर एवं ग्रामो में अवैध लकड़ियों से फर्नीचर बनाने का काम बेख़ौफ, बगैर परमिशन के निर्बाध गति से चल रहे है। जहां वनकर्मियों के द्वारा भेंट पूजा स्वीकारते देखा जा सकता है। आम जनता से वास्ता न रखने वाले इस विभाग की कार्यशैली पर किसी की निगाह नही जाती। जिसमे आलपिन खरीदने से लेकर जंगली जानवरों,लाठी,हेलमेट, टार्च,पोल,दवाई,फटाके,बारबेट वायर,बांस,बल्ली,करील,मसरूम आदि सभी मे व्यापक भ्रष्टाचार फलता फूलता है। एक बार यदि किसी को वनमंडल में किसी भी पद पर नौकरी मिल गई तो समझो कि उसका जीवन सफल हो गया। भ्रष्टाचार करने के इतने साधन और उपाय है कि जिसे चाहकर भी उजागर करना असंभव है। यदि कोई एक बड़े भवन का निर्माण होता है तो उसमें 90% अवैध सागौन,बीजा,साल,खम्हार आदि की लकड़ियों के चौखट,दरवाजे,खिड़कियां,फर्नीचर आदि बने होते है। शहर के बीच से ट्रैक्टरों,पिकप वाहनों में लदे लकड़ियों के गोलों का परिवहन होता देखा जा सकता है। कभी कभार पुलिस ने कार्यवाही कर दी तब तो ठीक है। वन विभाग ने कभी कोई बड़ी कार्यवाही की हो ऐसा कोई मामला अब तक सामने नही आया है। वन विभाग के कर्मचारियों ने अपनी झूठी वाहवाही करवाने के लिये बकायदा वेतनभोगी लोगो को रखा हुआ है जो उनके काले कारनामो पर पर्दा डालकर कवच का कार्य करते है। क्रमशः—— लगातार—– टूटी कलम✍️✍️








