देवउठनी एकादशी एवं तुलसी विवाह के शुभअवसर पर अजय इंगार्ड के कार्य का होगा शुभारंभ, मात्र 100 लोगो की उपस्थिति में जनसुनवाई का दिखावा किया जाकर उद्योग को एन ओ सी प्रदान कर दी जायेगी। जो 100 लोग उपस्थित होंगे वे कम्पनी के तथाकथित करिन्दे,कुछनेता,कुछ मीडिया वाले,कुछ विभागीय अधिकारी, कर्मचारी,संघर्ष मोर्चा,केलो बचाओ,पर्यावरण प्रेमी को ही प्रवेश दिया जायेगा। यह जनसुनवाई न होकर कम्पनी के पक्ष में षडयंत्र हो सकता है। लगने जा रहे अजय इंगार्ड को हरी झंडी देने के लिए जनसुनवाई की जा रही है। जबकि जन की उपस्थिति पर रोक लगा दी गई है। उद्योग के आसपास कई गांव है। जहां की जनसंख्या हजारों है परन्तु बाउंसरों के दम पर जनसुनवाई की जा सकती है। जनसुनवाई में उन्ही को न्यौता दिया जायेगा जो उद्योग के पक्ष में ही बाते करेगा। इसके लिये 100 लोगो को नामित कर लिफाफे पहुंचा दिए जायेंगे ताकि लक्ष्मी के बोझ तले कोई भी विरोध न कर पायेगा।
वर्तमान में कोरोनाकाल चल रहा है। धारा 144 प्रभावशील है।इसके बावजूद 100 लोगो की उपस्थिति क्या कानून का उलंघन नही है।क्या इससे कोरोना संक्रमण फैलने का खतरा नही है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार जब से पर्यावरण अधिकारी ने पद संभाला है। तब से एक भी जनसुनवाई न होने की वजह से उनका मन रायगढ़ से उचट गया है। सम्भवतः वे इस जनसुनवाई उपकृत होकर अपना स्थानांतरण करवा लेवे।
किसी के मरने पर 20,शादी आदि पर 50 लोगो को ही शामिल होने की अनुमति है परन्तु आपदा काल मे जनसुनवाई में 100 लोगो की अनुमति मिलना समझ से परे है। जनसुनवाई कोरोना खत्म होने पर सम्पन्न की जानी चाहिए। एक तरफ लोग बीमार पड़ रहे है,मर रहे है,आर्थिक स्थिति डांवाडोल है,जनता हलाकान है,भविष्य अनिश्चितता में है परन्तु उद्योग लगाने में व्याग्रता है। यदि माहौल महाजैंको की जनसुनवाई की तरह से बिगड़ जायेगा तब इसका जिम्मेवार किसे समझा जायेगा।
दुनिया के प्रदूषित शहरों में प्रथम पायदान पर अग्रसर रायगढ़ में और उद्योग लगाना क्या सही होगा। अब जबकि मुख्यमंत्री ने भी कह दिया है कि प्रदेश और बड़े उद्योग नही लगने दिये जायेंगे तो क्या पर्यावरण विभाग मुख्यमंत्री के आदेश की अवहेलना नही कर रहा है।
यदि 100 व्यक्ति के प्रवेश की अनुमति के बावजूद आसपास के गांव वालो,कम्पनी से लिफाफा चाहने वालो,स्थानीय लोगो को रोजगार की दुकानदारी चलाने वालो का हुजूम उमड़ पड़ेगा तब इन्हें कौन रोकेगा।







