सरकार के पास दिमागदारो की कमी नही है.लोगो ने ऐसे ऐसे सुझाव दे डाले की सरकार का काम भी बन गया और जनता भी खुश हो गई.
सरकार ने जनता को सुबह जगाने के लिये दिनचर्या की वस्तुओं की खरीदने के लिए सुबह 5 से 9 तक की सीमा तय कर घर में “काम का काज का दुश्मन अनाज का” माने जाने वालों को काम दिला दिया.जिसको अलसुबह उठकर जरूरत की वस्तुएँ खरीदने का कार्य मिल गया. घर मे पड़े देर तक सोकर उठने वालो को 5 से 6 योगा,7 से 8 खरीदारी का 9 से 10 रामायण सीरियल तो 10 से 11 महाभारत सीरियल देखकर मनोरंजन करने का उसके बाद तेज धूप,गर्मी के डर से घर से बाहर निकलने का मन न करने की वजह से लाकडाउन सफल हो रहा है.

धीरे धीरे कर आदमी की दिनचर्या ही बदल जायेगी. सुबह जल्दी उठकर 12 बजे तक सारे काम फिर लाकडाउन फिर 5 बजे से रात्रि 8 बजे तक बाकी बचे काम फिर लाकडाउन इस तरह की आदत बन जाने पर देश के बिगड़ते हालात नियंत्रण में किये जा सकते है.किसी के पास ही,ही,बक बक करने का समय ही नही रहेगा.बढ़ते अपराध के ग्राफ में आश्चर्यजनक रूप से कमी आ जायेगी । जिसे मात्र 4 दिन के ताला बन्दी के असर से मूल्यांकन किया जा सकता है.
निर्भया कांड के आरोपियों को फांसी पर लटकाने पर भी कोई क्रिया प्रतिक्रिया नही देखी गई क्यूंकि इंसान को पहले अपना भला सोचना पड़ गया.बेफिजूल की बातों में समय जाया करने का समय ही किसी के पास नही रहा. पूरा देश एक हो गया,भेदभाव, जातिवाद की राजनीति ने चादर ओढ़ ली.
यदि चैत्र नवरात्र पर मन्दिरो में भीड़ नही होगी तो मस्जिदों में नमाज अदा नही होगी,चर्चो में प्रार्थना नही होगी.यह इस बात का संकेत है कि देश के लिए जनता एक बराबर है.
शराब छुड़ाने का आसान तरीका सरकार ने समझा दिया और शराबबंदी पर चिल्लाने वालो की भी लगाम कस दी.चिकन,मटन,मछली त्यागने शाक भाजी,दूध पीने की आदत बनवाने का प्रयास चल रहा है.यदि यही हाल रहा तो जनमानस को स्वयं को मांसाहारी, शराबी कहलाने में भी शर्म आने लग जायेगी एवं ये सब खाने पीने से भी विरक्ति सी होने लग जायेगी.







