टूटी कलम रायगढ़-— इन दिनों रायगढ़ जिले में दवा दुकान खोलने की और डिस्काउंट देने की होड़ सी मच गई है। जब से दवा दुकानों के लाइसेंस ड्रग इंस्पेक्टर को बनाने के अधिकार दिए गए है तब से प्रत्येक दिन नई नई दवा दुकाने धड़ाधड़ खुलते जा रही है। दवा दुकानों को खोलने के लिए जो मापदंड होने चाहिए। उसे ओषधि विभाग नजरअंदाज कर फिक्स रकम 50 हजार रुपये लेकर पान दुकान नुमा स्थल पर भी दवा दुकान खोलने, बेचने का अधिकार प्रदान कर रहा है।
10 प्रतिशत,15 प्रतिशत,20 प्रतिशत,25 प्रतिशत तक कि छूट देने के आकर्षक तरीके से नई नई खुल रही दवा दुकाने इस बात की चुगली करती है कि दवा दुकानों में न जाने कितनी कमाई है ? यह सब देखकर नये व्यवसाय की शुरुआत करने वाले दवा दुकान खोलने की ओर आकर्षित हो रहे है। इस तरह से छूट देने पर लोगो का ध्यान दवा व्यवसाय की ओर खींचा जाना लाजिमी भी है।
बगैर कानून कायदों,नियमो का पालन किये संचालित होती है दवा दुकाने— दवा दुकान संचालन के लिए बहुत से सख्त नियम कानून के पालन की आवश्यकता होती है परन्तु यदाकदा किसी दुकान की जांच की खानापूर्ति कर ओषधि विभाग मोटी रकम लेकर चुप्पी साध लेता है। जानकार सूत्र बतलाते है कि ओषधि निरीक्षक का सभी दवा दुकानदारो से दीपावली पर नजराना मिलना फिक्स रहता है। जिस वजह से दुकाने किराना दुकानों की तर्ज पर संचालित होती है।
दवा दुकानदारो के द्वारा दिये जाने वाले डिस्काउंट यह बतलाते है कि दवा व्यवसाय में मोटा मुनाफा है। जिसे कम बतलाकर दवा व्यवसाई सरकार के gst एवं आयकर को चपत लगाते है। आयकर विभाग एवं gst विभाग यदि दवा दुकानों के हिसाब किताब को बारीकी से खंगाले तो कर चोरी के बड़े खुलासे निश्चित रूप से होंगे।
फाइजर,जी एस के, लूपिन,अब्बोट, डाक्टर रेड्डी,सिपला आदि सरीखी बहुराष्ट्रीय कंपनियों की दवाओं को चुनोती दे रही है। मैनकाइंड, मैकलियाड़ जैसी कम्पनियां जिनकी दवा के मूल्य काफी रहते है। मगर ये बीमारियों में कितने फायदेमंद होती है। इसे तो उपभोक्ता ही बतला पाएंगे। इन कम्पनियों के द्वारा दवाइयों में 1+1,2+1 फ्री की स्कीम भी दुकानदारो को दी जाती है एवं डाक्टरो को सोने की चैन,लेपटॉप,,फ्रिज,ए सी,विदेश टूर का भी पैकेज आदि आकर्षक गिफ्ट इन कम्पनियों की ही दवा लिखने पर बांटे जाते है। भले ही दवा बीमारियों से लड़ने में कारगर हो या न हो ? ऑन लाइन दवा खरीदी करने पर दवा में 40 प्रतिशत तक कि छूट देने के विज्ञापन भी गूगल पर देखे जा सकते है। जिसको देखकर लगता है कि दवा व्यवसाय,क्वालिटी कंट्रोल,मूल्य निर्धारित करने पर सरकार की कोई पकड़ नही है।पूरा रामराज्य चल रहा है,अंधेरगर्दी मची हुई है।
डिस्काउंट भी घर पहुंच सेवा भी—- किसी के सुख दुख में खड़े न होने वाले दवा दुकानदार अपने फायदे के लिए दवा में भारी डिस्काउंट देने एवँ घर पहुंच सेवा देने का व्यापक प्रचार एवं प्रसार करते है। जिसे रोकने में तथाकथित केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एशोसिएशन नाकाम साबित होती है क्योंकि इस व्यवसाय से उनके भाई बन्धु,रिश्तेदार आदि जुड़े रहते है। अखबारों,सोशल मीडिया, फेसबुक,इंस्टाग्राम, व्हाट्सअप ग्रुपो,बड़े बड़े होर्डिंग्स लगाकर दवा में भारी छूट देने के प्रचार प्रसार किये जाते है। जिनके सामने दवा यूनियन पंगु बन जाती है ।
नशीली दवा कोडीन,नाइट्रा, स्पास्मो,फोर्टविन,बटरम आदि बेचकर कर ली जाती है नुकसान की भरपाई—ओड़िसा राज्य से उक्त प्रतिबंधित दवा लाकर युवाओ को ओने पौने दामो पर बेची जाती है फलस्वरूप युवा वर्ग नशे का आदि होकर अपना भविष्य बर्बाद कर लेता है। देश के युवा वर्ग को खोखला करने में दवा व्यवसाइयों का सबसे बड़ा हाँथ होता है ।







